क्या हक है मुझे?

क्या हक है मुझे? व्याख्या करने का तुम्हारी। तुम्हें बताने का कि कितना बेहतर हुआ हूं मैं तुम्हारे साथ। कितना सवर जाता हूं तुम्हें सुनकर मैं। तुम्हारी गलतियों को जतलाने का। तुम्हें बताने का की कितने खास हो सकते हो तुम। सबसे ऊचा उड़ सकते हो तुम। क्या कर सकता हूं मैं अपने सबसे सुंदर […]


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एक कविता

एक कविता सी ही तो हो ना तुम। कहानी सी बतलाती ,आशाओं से भरी  हुई। शब्दों सी गहरी,अर्थ से भी खूबसूरत। एक प्यारी सी ,सबसे सुंदर कलम से गढ़ी हुई, एक कविता। स्थाई जैसी निरर्थक, अंतरे जैसे तजुर्बे अपनाए हुए। एक कविता सी ही तो हो तुम। तुम्हें कोई पढ़ें तो पसंद नहीं आता। शीर्षक […]


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